Physiology: Ayurveda General Knowledge Questionnaire-1

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Physiology: Ayurveda General Knowledge Questionnaire-1
शरीरक्रियाविज्ञान: आयुर्वेद सामान्य ज्ञान प्रश्नावली-1


(1) “आयुरस्मिन् विद्यते अनेन् वा आयुर्विन्दति इति आयुर्वेदः” – यह आयुर्वेद की ….. है।

(क) निरूक्ति (ख) व्युत्पत्ति (ग) परिभाषा (घ) लक्षण
(2) आयुर्वेद की व्यवहारिक परिभाषा किस आचार्य ने दी है?

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग) काष्यप (घ) भावप्रकाश
(3) आयुर्वेद का प्रयोजन है-

(क) स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना (ख) रोगी के रोग का उन्मूलन करना (ग) अ, ब दोनों (घ) उपरोक्त में से कोई नहीं
(4) निम्नलिखित में किसके संयोग को आयु कहते हैं?

(क) शरीर, सत्व, बुद्धि, आत्मा (ख) सत्व, आत्मा, शरीर (ग) शरीर, बुद्धि, आत्मा (घ) शरीर, इन्द्रिय, सत्व, आत्मा
(5) ‘चेतनानुवृत्ति’ किसका पर्याय है।

(क) मन (ख) आत्मा (ग) शरीर (घ) आयु
(6) निम्नलिखित में से कौनसा कथन सत्य हैं ?

(क) ‘अनुबन्ध’ आयु का पर्याय है (ख) ‘अनुबन्ध’ हेतु का भेद है। (ग) दोनों (घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
(7) निम्नलिखित में से कौनसा मिलाप सत्य है ?

(क) जीवितम् = आयु (ख) जीवसंक्षिणी = धमनी (ग) जीवितायन = स्रोत्रस (घ) उपर्युक्त सभी
(8) हितायु एवं अहितायु और सुखायु एवं दुःखायु के लक्षणों का वर्णन चरक संहिता में कहॉ मिलता है ?

(क) दीर्घजीवितीयमध्याय (ख) अर्थेदषमहामूलीय अध्याय (ग) रसायन चिकित्सा अध्याय पाद 1 (घ) शरीरविचय शारीर अध्याय
(9) आचार्य चरक ने अष्टांग आयुर्वेद के क्रम में ‘भूतविद्या’ को किस स्थान पर रखा है।

(क) 3 (ख) 4 (ग) 5 (घ) 6
(10) आचार्य सुश्रुत ने अष्टांग आयुर्वेद के क्रम में ‘अगदतंत्र’ को कौनसा स्थान दिया है।

(क) तृतीय (ख) चतुर्थ (ग) पंचम् (घ) षष्टम्
(11) अगदतंत्र को ‘विषगर वैरोधिक प्रशमन’ की संज्ञा किसने दी है ?

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग) वाग्भट्ट (घ) भावप्रकाश
(12) शालक्य तंत्र को ‘ऊर्ध्वांग’ की संज्ञा किसने दी है ?

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग) वाग्भट्ट (घ) भावप्रकाश
(13) वाग्भट्ट ने अष्टांग आयुर्वेद में ‘अगद तंत्र’ का उल्लेख किस नाम से किया है ?

(क) विषगर वैरोधिक प्रशमन (ख) विषतंत्र (ग) दंष्ट्रा चिकित्सा (घ) जांगुलि तंत्र
(14) दोष धातु मल मूलं हि शरीरम् – किसका कथन है।

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग) अष्टांग हृदय (घ) अष्टांग संग्रह
(15) शक्ति युक्त द्रव्य है –

(क) दोष (ख) धातु (ग) मल (घ) उपर्युक्त सभी
(16) ‘दूषयन्तीति दोषाः’ – किसका कथन है।

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग) अष्टांग हृदय (घ) शारंर्ग्धर
(17) शारीरिक दोषों की संख्या है-

(क) 2 (ख) 3 (ग) 4 (घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
(18) शारीरिक दोषों में प्रधान होता है-

(क) वात (ख) पित्त (ग) कफ (घ) रक्त
(19) ‘वात पित्त श्लेष्माण एव देह सम्भव हेतवः’ – किस आचार्य का कथन है ?

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग) वाग्भट्ट (घ) शांरर्ग्धर
(20) ‘वातपित्तकफा दोषाः शरीरव्याधि हेतवः।’ – किस आचार्य का कथन हैं।

(क) सुश्रुत (ख) चरक (ग) वाग्भट्ट (घ) काष्यप
(21) मानसिक दोषों की संख्या है।

(क) 1 (ख) 2 (ग) 3 (घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
(22) मानसिक दोषों में प्रधान होता है।

(क) सत्व (ख) रज (ग) तम (घ) इनमें से कोई नहीं
(23) ‘दोषों की व्युत्पत्ति’ का वर्णन किस आचार्य ने किया है।

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग) वाग्भट्ट (घ) शांरर्ग्धर
(24) ‘दोषों की उत्पत्ति’ का वर्णन किस आचार्य ने किया है।

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग) वाग्भट्ट (घ) शांरर्ग्धर
(25) ‘दोषों के मनोगुणों’ का वर्णन किस आचार्य ने किया है।

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग) वाग्भट्ट (घ) शांरर्ग्धर
(26) ‘दोषो की पांच्चभौतिकता’ का वर्णन किस आचार्य ने किया है।

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग) वाग्भट्ट (घ) शांरर्ग्धर
(27) ’पित्तमाग्नेयं’ किस आचार्य का कथन है।

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग) वृद्ध वाग्भट्ट (घ) चक्रपाणि
(28) ’आग्नेय पित्तम्’ किस आचार्य का कथन है।

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग) वृद्ध वाग्भट्ट (घ) चक्रपाणि
(29) ’अग्निमादित्यं च पित्तं’ किस आचार्य का कथन है।

(क) भेल (ख) हारीत (ग) काष्यप (घ) चक्रपाणि
(30) अष्टांग संग्रहकार के अनुसार ‘वात’ दोष का निर्माण कौनसे महाभूत से होता है ?

(क) वायु (ख) आकाष (ग) वायु और आकाष (घ) उपरोक्त में से कोई नहीं
(31) वृद्धावस्था में कौनसे दोष का प्रकोप होता है।

(क) वात (ख) पित्त (ग) कफ (घ) रक्त
(32) वाग्भट्टानुसार हृदय और नाभि के ऊपर कौनसे दोष का स्थान रहता है।

(क) वात (ख) पित्त (ग) कफ (घ) उपर्युक्त सभी
(33) पूर्वान्ह में कौनसे दोष का प्रकोप होता है।

(क) वात (ख) पित्त (ग) कफ (घ) त्रिदोषश्
(34) भोजन परिपाक काल के मध्य में कौनसे दोष का प्रकोप होता है।

(क) वात (ख) पित्त (ग) कफ (घ) इनमें से कोई नहीं
(35) दिन के अपरान्ह में किस दोष का प्रकोप होता है।

(क) वात (ख) पित्त (ग) कफ (घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
(36) मध्यरात्रि में किस दोष का प्रकोप होता है।

(क) वात (ख) पित्त (ग) कफ (घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
(37) भुक्तमात्रे अवस्था में कौनसे दोष का प्रकोप होता है।

(क) वात (ख) पित्त (ग) कफ (घ) उपर्युक्त सभी
(38) दोष, धातु और मलों के आश्रय एवं आश्रयी भाव सम्बन्ध का वर्णन किस आचार्य ने किया है।

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग) वाग्भट्ट (घ) शारंर्ग्धर
(39) ‘तत्रास्थानि स्थितो वायुः, असृक्स्वेदयोः पित्तम्, शेषेषु तु श्लेष्मा।’ – किस आचार्य का कथन है।

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग) वाग्भट्ट (घ) शारंर्ग्धर
(40) कफ दोष का आश्रयी स्थान नहीं है।

(क) रस (ख) रक्त (ग) मांस (घ) मेद
(41) ‘मूत्र’ कौनसे दोष का आश्रय स्थान है।

(क) वात (ख) पित्त (ग) कफ (घ) उपर्युक्त सभी
(42) शरीर में वात दोष की वृद्धि होने पर कौनसी चिकित्सा करनी चाहिए है।

(क) लंघन (ख) बृंहण (ग) अपतर्पण (घ) संतर्पण
(43) वातशामक श्रेष्ठ रस होता है।

(क) मधुर (ख) अम्ल (ग) लवण (घ) कषाय
(44) पित्तशामक श्रेष्ठ रस होता है।

(क) मधुर (ख) तिक्त (ग) लवण (घ) कषाय
(45) कफशामक अवर रस होता है।

(क) कटु (ख) तिक्त (ग) लवण (घ) कषाय
(46) किन रसों के सेवन से वात दोष का शमन होता है।

(क) अम्ल-कटु-तिक्त (ख) अम्ल-तिक्त-कषाय (ग) मधुर-अम्ल-लवण (घ) कटु-कषाय-तिक्त
(47) किन रसों के सेवन से कफ दोष का प्रकोप होता है।

(क) अम्ल-कटु-तिक्त (ख) अम्ल-तिक्त-कषाय (ग) मधुर-अम्ल-लवण (घ) कटु-कषाय-तिक्त
(48) ’वात’ का मुख्य स्थान ‘श्रोणिगुदसंश्रय’ किस आचार्य ने माना है।

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग) वाग्भट्ट (घ) शांरर्ग्धर
(49) वाग्भट्टानुसार ’पित्त’ का मुख्य स्थान है।

(क) आमाशय (ख) पक्वामाशय मध्य (ग) नाभि (घ) उर्ध्व प्रदेश
(50) सुश्रुतानुसार ’कफ’ का मुख्य स्थान है।

(क) आमाशय (ख) उरः प्रदेश (ग) नाभि (घ) उर्ध्व प्रदेश
(51) वात का स्थान ‘अस्थि-मज्जा’ किस आचार्य ने बतलाया है ?

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग) वाग्भट्ट (घ) काष्यप
(52) चरकानुसार ’पित्त’ का स्थान है ।

(क) रूधिर (ख) रस (ग) लसीका (घ) उपरोक्त सभी
(53) पित्त का अन्य स्थान ‘हृदय’ किस आचार्य ने माना है ?

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग) वाग्भट्ट (घ) काष्यप
(54) वाग्भट्टानुसार ’क्लोम’ किसका स्थान है।

(क) वात (ख) पित्त (ग) कफ (घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
(55) ’उत्साह’ किस दोष का कर्म है।

(क) वात (ख) पित्त (ग) कफ (घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
(56) ’मेधा’ किस दोष का कर्म है।

(क) वात (ख) पित्त (ग) कफ (घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
(57) ’क्षमाधृतिरलोभश्च’ किस दोष का कर्म है।

(क) वात (ख) पित्त (ग) कफ (घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
(58) चरकानुसार ‘ज्ञान-अज्ञान’ में कौनसा दोष उत्तरदायी होता है।

(क) वात (ख) पित्त (ग) कफ (घ) आम
(59) आचार्य चरक ने वात के कितने गुण बतलाए हैं।

(क) 5 (ख) 6 (ग) 7 (घ) 8
(60) वात का गुण ‘दारूण’ किसने माना है।

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग) वाग्भट्ट (घ) कुष
(61) वाग्भट्ट ने वात का कौनसा गुण नहीं माना है।

(क) सूक्ष्म (ख) चल (ग) विषद (घ) खर
(62) वात को ‘अचिन्त्यवीर्य’ किस आचार्य ने कहा है।

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग) वाग्भट्ट (घ) शारंर्ग्धर
(63) वात को ‘अमूर्त’ संज्ञा किसने दी है।

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग) वाग्भट्ट (घ) शारंर्ग्धर
(64) आचार्य चरक ने ‘भगवान्’ संज्ञा किसने दी है।

(क) आत्रेय (ख) वायु (ग) अ, ब दोनों (घ) काल
(65) वाग्भट्ट ने पित्त के कितने गुण बतलाए हैं।

(क) 5 (ख) 6 (ग) 7 (घ) 8
(66) ‘सर’ कौनसे दोष का गुण हैं।

(क) वात (ख) पित्त (ग) कफ (घ) रक्त
(67) वाग्भट्टानुसार ‘लघु’ किस दोष का गुण है।

(क) वात (ख) पित्त (ग) कफ (घ) अ, ब दोनों
(68) पित्त को ‘मायु’ की संज्ञा किसने दी है।

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग) ऋग्वेद (घ) अर्थववेद
(69) शांरर्ग्धर के अनुसार ‘पित्त’ का प्राकृतिक रस होता है।

(क) कटु (ख) तिक्त (ग) कटु, तिक्त (घ) अम्ल
(70) विदग्धावस्था में कफ का रस होता है।

(क) कटु (ख) मधुर (ग) लवण (घ) अम्ल
(71) चरकोक्त वात के 7 गुणों एवं कफ के 7 गुणों में कितने समान है।

(क) 1 (ख) 2 (ग) 3 (घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
(72) वाग्भट्टानुसार ‘मृत्स्न’ किस दोष का गुण है।

(क) वात (ख) पित्त (ग) कफ (घ) अ, ब दोनों
(73) शारंर्ग्धरानुसार ‘तमोगुणाधिकः’ किस दोष का गुण है।

(क) वात (ख) पित्त (ग) कफ (घ) अ, ब दोनों
(74) ‘वेगविधारण’ करने से किस दोष का प्रकोप है।

(क) वात (ख) पित्त (ग) कफ (घ) त्रिदोष
(75) ‘क्रोध’ करने से किस दोष का प्रकोप है।

(क) वात (ख) पित्त (ग) कफ (घ) त्रिदोष
(76) चरकानुसार वात का प्रकोप किस ऋतु में होता है।

(क) बर्षा (ख) बसंत (ग) ग्रीष्म (घ) प्रावृट्
(77) सुश्रुतानुसार वात का प्रकोप किस ऋतु में होता है।

(क) बर्षा (ख) बसंत (ग) ग्रीष्म (घ) प्रावृट्
(78) चरकानुसार कफ का संचय किस ऋतु में होता है।

(क) शरद (ख) हेमन्त (ग) षिषिर (घ) बसंत
(79) वाग्भट्टानुसार कफ का संचय किस ऋतु में होता है।

(क) शरद (ख) हेमन्त (ग) षिषिर (घ) बसंत
(80) चरकानुसार कफ का निर्हरण किस मास में करना चाहिए।

(क) श्रावण मास (ख) आषाढ मास (ग) चैत्र मास (घ) अगहन मास
(81) चरक मतानुसार पित्त का निर्हरण विरेचन द्वारा किस मास में करना चाहिए ?

(क) श्रावण मास (ख) आषाढ मास (ग) चैत्र मास (घ) मार्गशीर्ष मास
(82) दोषों के कोष्ठ से शाखा और शाखा से कोष्ठ में गमन के कारण सर्वप्रथम किस आचार्य ने बतलाए है।

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग) वाग्भट्ट (घ) शारंर्ग्धर
(83) चरक ने दोषों के कोष्ठ से शाखा में गमन के कितने कारण बताए है।

(क) 3 (ख) 4 (ग) 5 (घ) इनमें से कोई नहीं
(84) चरक ने दोषों के शाखा से कोष्ठ में गमन के कितने कारण बताए है।

(क) 3 (ख) 4 (ग) 5 (घ) इनमें से कोई नहीं
(85) चरक ने दोषों के शाखा से कोष्ठ में गमन का कारण नहीं है।

(क) वृद्धि (ख) विष्यन्दन (ग) व्यायाम (घ) वायुनिग्रह
(86) बुद्धि, इन्द्रिय, हृदय और मन का धारण करना – कौनसी वायु का कर्म है ?

(क) प्राण वायु (ख) उदान वायु (ग) व्यान वायु (घ) समान वायु
(87) ‘महाजवः’ कौनसी वायु के लिए कहा गया है।

(क) प्राण वायु (ख) उदान वायु (ग) व्यान वायु (घ) समान वायु
(88) सार-किट्ट पृथक्करण किसका कार्य है।

(क) पाचक पित्त (ख) व्यान वायु (ग) समान वायु (घ) अ, स दोनों
(89) चरकानुसार अपान वायु का स्थान नही है।

(क) कटि (ख) श्रोणि (ग) नितम्ब (घ) उपर्युक्त सभी
(90) आचार्य सुश्रुत ने ’पवनोत्तम’ किसे कहा है ?

(क) उदान वायु (ख) प्राण वायु (ग) समान वायु (घ) व्यान वायु
(91) सुश्रुतानुसार किस वायु के कारण जठराग्नि प्रदीप्ति होती है ?

(क) प्राण वायु (ख) अपान वायु (ग) समान वायु (घ) उपरोक्त सभी
(92) शांरर्ग्धर के अनुसार पाचक पित्त का स्थान होता है।

(क) पक्वामाशय मध्य में (ख) अग्नाशय में (ग) पक्वाशय में (घ) ग्रहणी में
(93) पाचकपित्त की मात्रा ‘तिल प्रमाण’ किस आचार्य ने मानी है।

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग) वाग्भट्ट (घ) शांरर्ग्धर
(94) रंजक पित्त का स्थान आमाशय किस आचार्य ने माना है।

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग) वाग्भट्ट (घ) शांरर्ग्धर
(95) आचार्य वाग्भट्ट के अनुसार ‘रंजक पित्त’ का स्थान क्या है ?

(क) यकृत प्लीहा (ख) आमाशय (ग) यकृत (घ) प्लीहा
(96) साधक पित्त का स्थान होता है ?

(क) हृदय (ख) षिर (ग) नेत्र (घ) त्वचा
(97) ‘ओज एवं साधक पित्त’ एक ही किस आचार्य ने माना है।

(क) चरक (ख) चक्रपाणि (ग) डल्हण (घ) अरूणदत्त
(98) भेल के अनुसार ‘बुद्धिवैशेषिक’ आलोचक पित्त का स्थान होता है ?

(क) हृदय (ख) मूर्धा (ग) श्रृंगाटक (घ) भ्रू मध्य
(99) तर्पक कफ का स्थान होता है ?

(क) हृदय (ख) षिर (ग) उरू (घ) नाभि
(100) संधियों में स्थित कफ की संज्ञा है ?

(क) साधक (ख) क्लेदक (ग) अवलम्बक (घ) श्लेष्मक

उत्तरमाला

  1. क 21. ख 41. ग 61. ग 81. घ
  2. घ 22. ख 42. ख 62. ख 82. क
  3. ग 23. ख 43. ग 63. क 83. ख
  4. घ 24. ख 44. ख 64. ग 84. ग
  5. घ 25. घ 45. घ 65. ग 85. ग
  6. ग 26. ग 46. ग 66. ख 86. क
  7. घ 27. ख 47. ग 67. घ 87. ग
  8. ख 28. ग 48. ख 68. घ 88. ग
  9. ग 29. ग 49. ग 69. ग 89. घ
  10. घ 30. ग 50. क 70. ग 90. क
  11. क 31. क 51. घ 71. क 91. घ
  12. ग 32. ग 52. घ 72. ग 92. ख
  13. ग 33. ग 53. ख 73. ग 93. घ
  14. ख 34. ख 54. ग 74. क 94. ग
  15. ख 35. क 55. क 75. ख 95. ख
  16. क 36. ख 56. ख 76. क 96. क
  17. ख 37. ग 57. ग 77. घ 97. ग
  18. क 38. ग 58. ग 78. ख 98. ग
  19. ख 39. ग 59. ग 79. ग 99. ख
  20. घ 40. ख 60. घ 80. ग 100. घ

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