Ayurveda General Knowledge Questionnaire-18

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Ayurveda General Knowledge Questionnaire-18
चरकसंहिता सूत्रस्थान: आयुर्वेद सामान्य ज्ञान प्रश्नावली-18

(801) ‘इह हि द्रव्यं प×चमहाभूतात्मकम्।’- किसनेकहा है।

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग) वाग्भट्ट (घ) काश्यप
(802) कर्म पन्चविंधमुक्तं वमनादि-किसने कहाहै।

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग) काश्यप (घ) वाग्भट्ट
(803) आचार्य चरकानुसार ‘खर’ गुण कौनसे महाभूत में होता है।

(क) पृथ्वी (ख) वायु (ग) आकाश (घ) अ, ब दोनों
(804) आचार्य चरकानुसार ‘गुरू’ गुण कौनसे महाभूत में होता है।

(क) पृथ्वी (ख) जल (ग) पृथ्वी एवं जल (घ) कोई नहीं
(805) ‘आग्नेय द्रव्यों’ में ‘खर’ गुण किस आचार्य ने माना है।

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग) वाग्भट्ट (घ) शारंर्ग्धर
(806) ‘वायव्यद्रव्यों’ ‘व्यवायी, विकाशि’ गुण अतिरिक्तकिस आचार्य ने बतलाए है।

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग) वाग्भट्ट (घ) शारंर्ग्धर
(807) सुश्रुत एवं वाग्भट्ट के अनुसार ‘आकाशीयद्रव्यों’ का गुण नहींहै।

(क) लघु (ख) सूक्ष्म (ग) मृदु (घ) श्लक्षण
(808) ‘नानौषधिभूतं जगति किन्चिद् द्रव्यमुपलभ्यते’ – संदर्भ मूलरूप से उद्धत है ?

(क) चरक संहिता (ख) सुश्रुत संहता (ग) अष्टांग संग्रह (घ) भाव प्रकाश
(809) ‘इत्थं च नानौषधभूतं जगति किं×चद द्रव्यमस्ति विविधार्थप्रयोगवशात्।’ – संदर्भ मूलरूप से उद्धत है ?

(क) चरक संहिता (ख) सुश्रुत संहता (ग) अष्टांग संग्रह (घ) भाव प्रकाश
(810) यदा कुर्वन्ति स …..।

(क) कर्म (ख) वीर्य (ग) कालः (घ) उपायः
(811) यथा कुर्वन्ति स …..।

(क) कर्म (ख) वीर्य (ग) कालः (घ) उपायः
(812) येनकुर्वन्ति तत् …..।

(क) कर्म (ख) वीर्य (ग) कालः (घ) उपायः
(813) यत्कुर्वन्ति तत् …..।

(क) कर्म (ख) वीर्य (ग) कालः (घ) उपायः
(814) रसों के संयोग भेद बतलाए गए है।

(क) 57 (ख) 67 (ग) 62 (घ) 63
(815) रसों के विकल्पभेद बतलाए गए है।

(क) 57 (ख) 67 (ग) 62 (घ) 63
(816) दो-दो, तीन-तीन, चार-चार, पॉच-पॉच एंव छः रस आपस में मिलकर क्रमशः द्रव्य बनाते है ?

(क) 15, 20, 15, 20, 25 (ख) 12, 18, 24, 30, 36 (ग) 30, 24, 18, 12, 6 (घ) 15, 20, 15, 6, 1
(817) रसों के संयोग व कल्पना भेदहै क्रमशः।

(क) 63, 57 (ख) 57, 63 (ग) 55, 62 (घ) 62, 57
(818) 3 रसों के संयोग से रस भेद।

(क) 15 (ख) 20 (ग) 6 (घ) 5
(819) शुष्क द्रव्य का जिहृवा से संयोग होने पर सर्वप्रथम अनुभूत होता है।

(क)रस (ख) अनुरस (ग) निपात (घ) विपाक
(820) रस का विपयर्य है।

(क) ऊषण (ख) अनुरस (ग) क्षार (घ) पटु
(821) ‘रसो नास्तीह सप्तमः’ – किस आचार्य का कथन है।

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग) विदैह निमि (घ)शारंर्ग्धर
(822) चरक संहिता के किस अध्याय मेंपरादि गुणों एवंउनके लक्षणों का निर्देश है।

(क) यज्जः पुरूषीय (ख) आत्रेय भद्रकाप्यीय (ग) इन्द्रियोपक्रमणीय (घ) अन्नपानविधि
(823) ‘चिकित्सीय सिद्धि के उपाय’ हैं।

(क) इन्द्रिय गुण (ख) गुर्वादि गुण (ग) परादि गुण (घ) आत्म गुण
(824) ‘चिकित्सीय गुण’ हैं।

(क) इन्द्रिय गुण (ख) गुर्वादि गुण (ग) परादि गुण (घ) आत्म गुण
(825) चरकानुसार संयोग, विभागएंव पृथकत्व के क्रमशः भेद है –

(क) 3, 3, 2 (ख) 3, 3, 4 (ग) 3, 3, 3 (घ) 3, 2, 3
(826) ‘वियोग’किसका भेद है।

(क) संयोग (ख) विभाग (ग) पृथकत्व (घ) परिमाण
(827) ‘वैलक्षण्य’किसका भेद है।

(क) संयोग (ख) विभाग (ग) पृथकत्व (घ) परिमाण
(828) शीलन किसका पर्याय है।

(क) संयोग (ख) विभाग (ग) संस्कार (घ) अभ्यास
(829) परादि गुणों की संख्या 7 किसने मानी है।

(क) न्याय दर्शन (ख) वैशेषिकदर्शन (ग) सांख्यदर्शन (घ) योगदर्शन
(830) कणाद ने परादि गुणों में किसकी गणना नहीं कीहै।

(क) युक्ति (ख) अभ्यास (ग) संस्कार (घ) उपर्युक्त सभी
(831) ‘पवनपृथ्वी व्यतिरेकात्’ से किस रस का निर्माण होताहैं ? (च.सू.26/40)

(क) अम्ल (ख) लवण (ग) मधुर (घ) कषाय
(832) लवण रस का भौतिक संगठन है।

(क) पृथ्वी + जल (ख) जल + अग्नि (ग) पृथ्वी + अग्नि (घ) वायु + पृथ्वी
(833) गुरू, स्निग्ध व उष्ण गुण किस रस में उपस्थित होते है ?

(क) कटु (ख)तिक्त (ग) लवण (घ) अम्ल
(834) ’मनो बोधयति’ कौनसा रस है।

(क) मधुर (ख) अम्ल (ग) लवण (घ) कषाय
(835) ’क्रिमीन् हिनस्ति’ किस रस का कर्म है।

(क) अम्ल (ख) कटु (ग) तिक्त (घ) कषाय
(836) ’आहार योगी’ रस है।

(क) मधुर (ख) अम्ल (ग) लवण (घ) कटु।
(837) ’हदयं तर्पयति’ रस है।

(क) मधुर (ख) अम्ल (ग) लवण (घ) कटु
(838) ’हदयं पीडयति’ किस रस के अतिसेवन के कारणहोताहै।

(क) अम्ल (ख) कटु (ग) तिक्त (घ) कषाय
(839) ’शोणितसंघात भिनत्ति’ रस है।

(क) अम्ल (ख) कटु (ग) तिक्त (घ) कषाय
(840) ’विषघ्न’ रस है।

(क) लवण (ख) कटु (ग) तिक्त (घ) कषाय
(841) ’विषं वर्धयति’ किस रस के अतिसेवन के कारणहोता है।

(क) लवण (ख) कटु (ग) तिक्त (घ)कषाय
(842) ’पुंस्त्वमुपहन्ति’ किस रस के अतिसेवन के कारण होता है।

(क) कटु (ख) लवण (ग)कषाय (घ) उपर्युक्त सभी
(843) ’रक्त दूषयति’ किस रस के अतिसेवन के कारण होताहै।

(क) अम्ल (ख) कटु (ग) तिक्त (घ) कषाय
(844) ’गलगण्ड और गण्डमाला रोग’ किस रस के अतिसेवन के कारण होता है।

(क) मधुर (ख) अम्ल (ग) लवण (घ) कषाय
(845) ’स्तन्यशोधन’ किस रस का कार्यहै।

(क) अम्ल (ख) कटु (ग) तिक्त (घ) कषाय
(846) ’ज्वरघ्न’ किस रस का कार्यहै।

(क) अम्ल (ख) कटु (ग) तिक्त (घ) कषाय
(847) ’संशमन’ किस रस का कार्यहै।

(क) अम्ल (ख) कटु (ग) तिक्त (घ) कषाय
(848) तिक्तरस का कार्य है।

(क) विषघ्न (ख) कृमिघ्न (ग) ज्वरघ्न (घ) उपर्युक्त सभी
(849) कषायरस का कार्य है।

(क) शोषण (ख) रोपण (ग) पीडन (घ) उपर्युक्त सभी
(850) मधुररस का कार्य है।

(क) प्रीणन (ख) जीवन (ग) तर्पण (घ) उपर्युक्त सभी
(851) ’लेखन’ किस रस का कार्यहै।

(क) लवण (ख) कटु (ग) तिक्त (घ) कषाय
(852) ’सर्वरसप्रत्यनीक भूतः’ रस है।

(क) मधुर (ख) अम्ल (ग) लवण (घ) कटु
(853) ’भक्तं रोचयति’ रस है।

(क) मधुर (ख) अम्ल (ग) लवण (घ) कटु
(854) ’रोचयत्याहारम्’ रस है।

(क) मधुर (ख) अम्ल (ग) लवण (घ) कटु
(855) दीपन, पाचन कर्म किस रस का कर्म है।

(क) मधुर, अम्ल (ख) अम्ल, लवण (ग) कटु, लवण (घ)तिक्त, लवण
(856) ‘ऊर्जयति’ किस रस का कर्म है।

(क) अम्ल (ख) कटु (ग) तिक्त (घ) कषाय
(857) ‘रूक्षः शीतोऽलघुश्च’ गुण किस रस में उपस्थित होते है ?

(क) अम्ल (ख) मधुर (ग) लवण (घ) कषाय
(858) ‘लघु, उष्ण, स्निग्ध’ गुण किस रस में उपस्थित होते है ?

(क) अम्ल (ख) मधुर (ग) लवण (घ) कषाय
(859) चरक ने मध्यमगुरू किस रस को माना है।

(क) अम्ल (ख) लवण (ग) कषाय (घ) मधुर
(860) चरक ने उत्तम लघु किस रस को माना है।

(क) अम्ल (ख)लवण (ग) कटु (घ) तिक्त
(861) चरक ने उत्तम उष्ण किस रस को माना है।

(क) अम्ल (ख)लवण (ग) कटु (घ) तिक्त
(862) चरक ने अवर रूक्ष किस रस को माना है।

(क) अम्ल (ख) लवण (ग) कटु (घ) तिक्त
(863) चरक ने अवर स्निग्ध किस रस को माना है।

(क) अम्ल (ख)लवण (ग) कटु (घ) तिक्त
(864) चरक ने लवणरस का विपाक माना है।

(क) मधुर विपाक (ख) अम्लविपाक (ग) कटु विपाक (घ) कोई नहीं
(865) पित्तवर्धक, शुक्रनाश, सृष्टविडमूत्रल – कौनसे विपाक के गुणधर्म है।

(क) मधुरविपाक (ख) अम्लविपाक (ग) कटु विपाक (घ) उपर्युक्त सभी
(866) कौनसा विपाक ‘सृष्टविडमूत्रल’ होताहै।

(क) मधुर विपाक (ख) अम्लविपाक (ग) कटु विपाक (घ) अ, ब दोनों
(867) चरक मतानुसार कौनसा विपाक ‘शु्क्रलः’ होताहै।

(क) मधुर विपाक (ख) अम्लविपाक (ग) कटु विपाक (घ) अ, ब दोनों
(868) ‘विपाकः कर्मनिष्ठया’ – किसका कथन है।

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग) काश्यप (घ) वाग्भट्ट
(869) चरकने वीर्य के भेद माने है।

(क) 2 (ख) 15 (ग) 8 (घ) अ, स दोनों
(870) सुश्रुत ने वीर्य का कौनसा भेद नहीं माना है ?

(क) गुरू, लघु (ख) विशद, पिच्छिल (ग) स्निग्ध, रूक्ष, (घ) मदु, तीक्ष्ण
(871) वीर्य का ज्ञान होता है।

(क) निपात (ख) अधिवास (ग) दोनोंसे (घ) कर्मनिष्ठासे
(872) ’विदाहच्चास्य कण्ठस्य’ किस रस का लक्षण है।

(क) अम्ल (ख)लवण (ग) कटु (घ) तिक्त
(873) ’स विदाहान्मुखस्य च’ किस रस का लक्षण है।

(क) अम्ल (ख)लवण (ग) कटु (घ) तिक्त
(874) ’विदहन्मुखनासाक्षिसंस्रावी’ किस रस का लक्षण है।

(क)अम्ल (ख)लवण (ग) कटु (घ) तिक्त
(875) ’वैशद्यस्तम्भजाडयैर्यो रसनं’ किस रस का लक्षण है।

(क) लवण (ख) कटु (ग) तिक्त (घ) कषाय
(876) मरिच की तीक्ष्णता का ज्ञान होता है।

(क) निपात (ख) अधिवास (ग) दोनोंसे (घ) कर्मनिष्ठासे
(877) रसवीर्य विपाकानां सामान्यं यत्र लक्ष्यते। विशेषः कर्मणां चैव …..तस्य स स्मृतः।।

(क) पाचनः (ख) दीपनः (ग) प्रभावः (घ) वीर्यसंक्रान्ति
(878) ‘रसादि साम्ये यत् कर्म विशिष्टं तत् प्रभावजम्।‘- किसका कथन है ?

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग) काश्यप (घ) वाग्भट्ट
(879) चरकानुसार निम्न में से किसका नैसर्गिक बल सर्वाधिक है।

(क) रस (ख) विपाक (ग) वीर्य (घ) प्रभाव
(880) चरक ने वैरोधिक आहार केकितने घटक बताए हैं।

(क) 15 (ख) 18 (ग) 12 (घ) 5
(881) अम्ल पदार्थों के साथ दूध पीना हैं।

(क) संयोग विरूद्ध (ख) वीर्य विरूद्ध (ग) विधि विरूद्ध (घ) संस्कार विरूद्ध
(882) एरण्ड की लकड़ी की सींक पर भुना हुआ मोर का मांस हैं।

(क) संयोग विरूद्ध (ख) परिहार विरूद्ध (ग) उपचार विरूद्ध (घ) संस्कार विरूद्ध
(883) वाराह आदि का मांस सेवन कर फिर उष्ण वस्तुओं का सेवन करना हैं।

(क) संयोग विरूद्ध (ख) परिहार विरूद्ध (ग) उपचार विरूद्ध (घ) संस्कार विरूद्ध
(884) घृत आदि स्नेहों को पीकर शीतल आहार-औषध या जल पीना हैं।

(क) संयोग विरूद्ध (ख) परिहार विरूद्ध (ग) उपचार विरूद्ध (घ) संस्कार विरूद्ध
(885) गुड के साथ मकोय खाना हैं।

(क) संयोग विरूद्ध (ख) परिहार विरूद्ध (ग) उपचार विरूद्ध (घ) संस्कार विरूद्ध
(886) श्रम, व्यवाय, व्यायाम आदि में आसक्त व्यक्ति द्वारा वातवर्धक आहार का सेवन हैं।

(क) कर्म विरूद्ध (ख) प्रकृति विरूद्ध (ग) विधि विरूद्ध (घ) अवस्था विरूद्ध
(887) चरक ने दूध के साथ किसका निषेध नहीं बतलाया है।

(क) मूली (ख) मत्स्य (ग) सहिजन (घ) सूकर मांस
(888) सभी मछलियों को दूध के साथ खाना चाहिए किन्तु चिलिचिम मछली को छोडकर – किसका मत है।

(क) आत्रेय (ख) सुश्रुत (ग) वाग्भट्ट (घ) भद्रकाप्य
(889) मछलियों को दूध के साथ खाना हैं।

(क) संयोग विरूद्ध (ख) वीर्य विरूद्ध (ग) विधि विरूद्ध (घ) संस्कार विरूद्ध
(890) चरकोक्त ‘अर्जक, सुमुख और सुरसा’ किसके भेद है ?

(क) तुलसी (ख) त्रिवृत्त (ग) शतावरी (घ) दूर्वा
(891) ‘तुलसी’ शब्द सर्वप्रथममूलरूप से किस ग्रन्थ में उद्धत है ?

(क) चरक संहिता (ख) सुश्रुत सिंहता (ग) अष्टांग संग्रह (घ) भाव प्रकाश
(892) सीधु …..।

(क) जर्जरीकरोति (ख) वधमति (ग) ग्लयपति (घ)माचिनोति
(893) मधु…..।

(क) सन्दधीति (ख) पाचयति (ग) ग्लयपति (घ) स्नेहयति
(894) प्रायः सभी तिक्तद्रव्य वातल और वृष्य होते है …..को छोडकर।

(क) निम्ब (ख) पटोलपत्र (ग) पिप्पली (घ) बृहती
(895) शोफं जनयति ?

(क) पयः (ख) घृत (ग) दधि (घ) तक्र
(896) प्रायः सभी कटु द्रव्य वातल और अवृष्य होते है …..को छोडकर।

(क) चित्रक, मरिच (ख) वेताग्र, पटोलपत्र (ग) पिप्पली, शुण्ठी (घ) दाडिम
(897) द्राक्षासव ….. ।

(क) दीपयति (ख) पाचयति (ग) बृंहयति (घ) कर्षयति
(898) क्षार का स्वभाविक कर्म है।

(क) पाचन (ख) दहन (ग) क्षारण (घ) ग्लपयन
(899) निम्न में से कौन मधुर रस वाला होने पर भी कफवर्धक नहींहै।

(क) द्राक्षा (ख) मधु (ग) एरण्ड (घ) परूषक
(900) चरकने आहार द्रव्यों के कितने वर्ग बताये है।

(क) 12 (ख) 7 (ग) 6 (घ) 10

उत्तरमाला

  1. ग 821. क 841. क 861. ख 881. क
  2. क 822. ख 842. घ 862. घ 882. घ
  3. घ 823. ग 843. क 863. ख 883. ख
  4. क 824. ख 844. क 864. क 884. ग
  5. ख 825. ग 845. ग 865. ख 885. क
  6. ग 826. ख 846. ग 866. ख 886. घ
  7. क 827. ग 847. घ 867. ख 887. घ
  8. क 828. घ 848. घ 868. क 888. घ
  9. ग 829. ख 849. घ 869. घ 889. ख
  10. ग 830. घ 850. घ 870. क 890. क
  11. घ 831. घ 851. ग 871. ग 891. ग
  12. ख 832. ख 852. ग 872. क 892. ख
  13. क 833. ग 853. ख 873. ख 893. क
  14. क 834. ख 854. ग 874. ग 894. ख
  15. घ 835. ख 855. घ 875. घ 895. ग
  16. घ 836. ग 856. क 876. ग 896. ग
  17. ख 837. ख 857. घ 877. ग 897. क
  18. ख 838. घ 858. क 878. घ 898. घ
  19. क 839. ख 859. ग 879. घ 899. ख
  20. ख 840. ग 860. घ 880. ख 900. क
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