Ayurveda General Knowledge Questionnaire-10

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चरकसंहिता: आयुर्वेद सामान्य ज्ञान प्रश्नावली-10

(901) सुश्रुतने आहार द्रव्यों के कितने महावर्ग बताये है।

(क) 2 (ख) 7 (ग) 5 (घ) 3
(902) ‘चरक संहिता’ में मधु का वर्णन कौनसे वर्ग में मिलता है।

(क) मधु वर्ग (ख) इक्षु वर्ग (ग) कृतान्न वर्ग (घ) आहारयोगीवर्ग
(903) “वैदल वर्ग” का वर्णन कौनसे ग्रन्थ में है।

(क) चरक संहिता (ख) सुश्रुत संहता (ग) अष्टांग संग्रह (घ) भाव प्रकाश
(904) “सर्वानुपान वर्ग” का वर्णन कौनसे ग्रन्थ में है।

(क) चरक संहिता (ख) सुश्रुत संहता (ग) अष्टांग संग्रह (घ) अष्टांग हृदय
(905) “हरित वर्ग” का वर्णन कौनसे ग्रन्थ में है।

(क) चरक संहिता (ख) सुश्रुत संहता (ग) अष्टांग संग्रह (घ) अष्टांग हृदय
(906) “औषध वर्ग” का वर्णन कौनसे ग्रन्थ में है।

(क) चरक संहिता (ख) सुश्रुत संहता (ग) अष्टांग संग्रह (घ) अष्टांग हृदय
(907) “मूत्र वर्ग” का वर्णन कौनसे ग्रन्थ में ंनही है।

(क) चरक संहिता (ख) सुश्रुत संहता (ग) अष्टांग संग्रह (घ) अष्टांग हृदय
(908)”बहुवातशकृत कारक” धान्यहै।

(क) गोधूम (ख) यव (ग) गवेधूक (घ) षष्टिक धान्य
(909) ‘वातहर’ शिम्बी धान्य है ?

(क) कलाय (ख) माष (ग) राजमाष (घ) अरहर
(910) ‘ज्वर और रक्तपित्त’ में प्रशस्तधान्य है ?

(क) मूद्ग (ख) माष (ग) मोठ (घ) मसूर
(911) चरकमतानुसार कास, हिक्का, श्वास और अर्श के लिए हितकर द्रव्यहै।

(क) कुलत्थ (ख) काकाण्डोल (ग) श्यामाक (घ) उडद
(912) आचार्य चरक ने मांसवर्ग में कितने प्रकार की योनियॉ बतलाई है।

(क) 2 (ख) 6 (ग) 5 (घ) 8
(913) आचार्य चरक ने ‘चरणायुधा या कुक्कुट’ को कौनसे योनि वाले मांसवर्ग में रखाहै।

(क) प्रसह (ख) प्रदुत (ग) जांगल (घ) विष्किर
(913) आचार्य चरक ने ‘गवय या नीलगाय’ को कौनसे योनि वाले मांसवर्ग में रखाहै।

(क) प्रसह (ख) आनूप (ग) जांगल (घ) भूशय
(914) चरक ने शुक्ति और श्ांखक का वर्णन किस वर्ग में कियाहै।

(क) सुधा वर्ग (ख) सिकता वर्ग (ग) कृतान्न वर्ग (घ) मांसवर्ग
(915) आचार्य चरक ने ‘कपोत और पारावत’ को कौनसे योनि वाले मांसवर्ग में रखाहै।

(क) प्रसह (ख) प्रदुत (ग) जांगल (घ) विष्किर
(916) निम्न में से किस मांसवर्ग का मांस ‘लघु’ नहीं होता है।

(क) प्रसह (ख) प्रदुत (ग) जांगल (घ) विष्किर
(917) निम्न में से किसका मासं ‘बृंहण’ होता है।

(क) अजमांस (ख) चरणायुधा (ग) मत्स्य (घ) उपर्युक्त सभी
(918) निम्न में से किसका मासं ‘मेधास्मृतिकरः पथ्यः शोषघ्न’ होता है।

(क) ऐण मांस (ख) मयूर मांस (ग) कपोत मांस (घ) कूर्म मांस
(919) शरीरबंहणे नान्यत् खाद्यं मांसाद्विशिष्यते – किस आचार्य का कथन है।

(क)चरक (ख) सुश्रुत (ग) वाग्भट्ट (घ) भाव प्रकाश
(920) सक्षारं पक्वकूष्माण्डं मधुराम्लं तथा लघु। सृष्टमूत्रपुरीष च…..। (च.सू.27/113)

(क) सर्वदोषनिवर्हणम् (ख) वातकफहरं (ग) त्रिदोषघ्नः (घ) वातपहा
(921) चरक ने फलवर्ग का आरम्भ किससे किया है।

(क) खर्जूर (ख) मृद्विका (ग) द्राक्षा (घ) दाडिम
(922) सुश्रुत ने फलवर्ग का आरम्भ किससे किया है।

(क) खर्जूर (ख) मृद्विका (ग) द्राक्षा (घ) दाडिम
(923) चरकमतानुसार ‘टंक’ किसका पर्याय है।

(क) नाशपाती (ख) सेव (ग) फल्गु (घ) केला
(924) चरकमतानुसार ‘मोचा’ किसका पर्याय है।

(क) नाशपाती (ख) सेव (ग) फल्गु (घ) केला
(925) कच्चा बिल्व होता है।

(क) उष्णवीर्य (ख) कफवातजितम् (ग) दीपन (घ) उपर्युक्त सभी
(926) रसासृङमांसमेदोविकार नाशकहै।

(क) गुड (ख) हरीतकी (ग)विभीतक (घ) आमलकी
(927) चरकमतानुसार ‘लवलीफल’ होता है।

(क) वातलं (ख) कफवातघ्नः (ग) कफपित्तहर (घ) त्रिदोषघ्नं
(928) ‘सर्वान् रसान्लवणवर्जितान्’ किसके लिए कहा गयाहै।

(क) आमलक (ख) हरीतकी (ग) रसोन (घ) उपर्युक्त सभी
(929) चरकमतानुसार ‘विश्वभेषज’ किसका पर्याय है।

(क) आर्द्रक (ख) हरीतकी (ग) रसोन (घ) गुडूची
(930) क्रिमिकुष्ठकिलासघ्नो वातघ्नो गुल्मनाशनः – किसके संदर्भ में कहा गया है।

(क) आरग्वध (ख) यवक्षार (ग) लशुन (घ) पलाण्डु
(931) तीक्ष्ण मद्यहै।

(क) सुरा (ख) सीधु (ग) सौवीरक (घ) सुरासव
(932) सात्विक विधि से मद्यपान का वर्णन किस आचार्य ने किया है।

(क)चरक (ख) सुश्रुत (ग) काश्यप (घ) भाव प्रकाश
(933) ‘मधूलिका’ होती है।

(क) कफशामक (ख) कफवर्धक (ग) कफघ्न (घ) उपर्युक्तसभी।
(934) चरकोक्त अंतरिक्ष जल के गुण है।

(क) 15 (ख) 9 (ग) 6 (घ) 5
(935) अंतरिक्ष जल के ‘पाण्डुर भूमि’ पर गिरने पर किस रस की उत्पत्ति होगी।

(क) मधुर (ख) लवण (ग) तिक्त (घ) कषाय
(936) अंतरिक्ष जल के ‘कपिल भूमि’ पर गिरने परकिस रस की उत्पत्ति होगी।

(क) अम्ल (ख) लवण (ग) तिक्त (घ) क्षार
(937) कौनसी ऋतु में बरसने वाला जल ‘कषाय मधुररस और रूक्ष गुण’वाला होता है।

(क) हेमन्त (ख) बसन्त (ग) ग्रीष्म (घ) बर्षा
(938) ‘पथ्यास्ता निर्मलोदकाः।’ – यह गुण कौनसी नदियों के जल में मिलता है।

(क) हिमवत्प्रभवाः (ख) मलयप्रभवाः (ग) पूर्वसमुद्रगा (घ) पश्चिमाभिमुखाः
(939) चरकानुसार शिरोरोग, हृदयरोग, कुष्ठ, श्लीपदजनक। – यह गुण कौनसी नदियों के जल में मिलता है।

(क) पारियात्रप्रभवाः (ख) सह्यप्रभवाः (ग) विन्ध्यप्रभवा (घ) उपर्युक्त सभी
(940) निम्नलिखित त्रिदोषक प्रकोपक नहीं है।

(क) कुसुम्भ तैल (ख) सामुद्र जल (ग) प्रज्ञापराध (घ) मिथ्या आहार विहार
(941) चरकोक्त गोदुग्ध के गुण है।

(क) 15 (ख) 9 (ग) 6 (घ) 10
(942) प्रवरं जीवनीयानाम् …..उक्तंरसायनम्।(च.सू.27/218)

(क) क्षीर (ख) सर्पि (ग) मधु (घ) शिवा
(943) चरकानुसार किसका दुग्ध ‘शाखा वातहरं’ होता है।

(क) हस्ति (ख) उष्ट्र (ग) माहिषी (घ) एकशफ
(944) जीवनं वृहणं सात्म्यं स्नेहनं मानुषं पयः। नावनं …..च तर्पणं चाक्षिशूलिनाम्।।

(क) पीनसे (ख) रक्तपित्ते (ग) शिरशूले (घ) अर्दिते
(945) चरकानुसार अत्यग्नि नाशक है।

(क) गोमांस (ख) माहिषीदुग्ध (ग) आविमांस (घ) अ, ब दोनों
(946) त्रिदोषक प्रकोपक होता है।

(क) मन्दक (ख) पीयूष (ग) मोरट (घ) किलाट
(947) चरकमतानुसार ‘योनिकर्णशिरःशूल नाशक’ घृत है।

(क) पुराण घृत (ख) प्रपुराण (ग) जीर्णघृत (घ) कौम्भघृत
(948) प्रभूतक्रिमिमज्जासृड्मेदोमांसकरो है।

(क) गुड (ख) हरीतकी (ग) विभीतक (घ) आमलकी
(949) ‘घृत वर्ण’ का मधु किससे प्राप्त होता है।

(क) माक्षिक (ख) क्षौद्र (ग) भ्रामर (घ) पौत्तिक
(950) ‘कपिल वर्ण’ मधु होता है।

(क) माक्षिक (ख) क्षौद्र (ग) भ्रामर (घ) पौत्तिक
(951) मधु का रस होता है।

(क) मधुर (ख) कषाय (ग) मधुर, कषाय (घ) मधुर, लवण
(952) चरक ने किसे योगवाहि नहीं कहा है।

(क) पिप्पली (ख) मधु (ग) घृत (घ) वायु
(953) नातः कष्टतमं किंचित …..त्तद्धि मानवम्। उपक्रम विरोधित्वात् सद्योहन्याद्यथाविषम्। – किसके संदर्भ में कहा है।

(क) दूषी विष (ख) मूढगर्भ (ग) अजीर्ण (घ) मध्वाम
(954) कौनसी जाति कामधु ‘गुरू’होता है।

(क) माक्षिक (ख) क्षौद्र (ग) भ्रामर (घ) पौत्तिक
(955) निम्नलिखित कौनसी अन्न कल्पना ‘ग्राहि’ है।

(क) पेया (ख)विलेपी (ग) मण्ड (घ) वेशवार
(956) वाग्भट्टानुसार निम्नलिखित कौनसी अन्न कल्पना ‘सबसे लघुतम’ है।

(क) पेया (ख)विलेपी (ग) मण्ड (घ) यवागू
(957) निम्नलिखित कौनसी अन्न कल्पना ‘प्राणधारण’ है।

(क)पेया (ख)विलेपी (ग) मण्ड (घ) वेशवार
(958) निम्नलिखित कौनसी अन्न कल्पना ‘दाहमूर्च्छानिवारण’ है।

(क) लाजपेया (ख)वेशवार (ग) मण्ड (घ) लाजमण्ड
(959) चरक ने ‘रागषाडव’ का वर्णन किस वर्ग में किया है।

(क) हरित वर्ग (ख) कृतान्न वर्ग (ग) आहारयोनि वर्ग (घ) कोई नहीं
(960) ….. संयोगसंस्करात् सर्वरोगापहं मतम्।- चरक ने किसके संदर्भ में कहा है।

(क) तैलं (ख) घृत (ग) पयः (घ) लवणं
(961) निम्नलिखित में से कौनसा तैल ‘सर्वदोषप्रकोपण’है।

(क) कुसुम्भ तैल (ख) सर्षप तैल (ग) एरण्ड तैल (घ) तिल तैल
(962) सभी तैलों का अनुरस होता है।

(क) मधुर (ख) लवण (ग) तिक्त (घ) कषाय
(963) चरक के मत से शुण्ठीका विपाक होता है।

(क) मधुर (ख) अम्ल (ग) कटु (घ) उपरोक्त कोई नहीं
(964) आर्द्र पिप्पली का रस होता है।

(क) मधुर (ख) कटु (ग) तिक्त (घ) कषाय
(965) कौनसी पिप्पली ‘बृष्य’ होती है।

(क) आर्द्र (ख) शुष्क (ग) दोनों (घ) उपरोक्त कोई नहीं
(966) कौनसा लवण शीत वीर्य होता है।

(क) सैन्धव (ख) सामुद्र (ग) सौर्वचल (घ) विड
(967) रोचनं दीपनं वृष्यं चक्षुष्यं अविदाहि। त्रिदोषघ्न, समधुर। – कौंनसा लवण होता है।

(क) सैन्घव (ख) सामुद्र (ग) सौर्वचल (घ) विड
(968) उर्ध्व चाधश्च वातानामानुलोम्यकरं लवण है।

(क) विड (ख) सामुद्र (ग) सौर्वचल (घ) औद्भिद्
(969) कौनसा क्षार अर्शनाशक होता है।

(क) यवक्षार (ख) सज्जीक्षार (ग) टंकण (घ) उपर्युक्त सभी
(970) चरक ने अन्नपान परीक्षणीय विषय बताएॅ है।

(क) 8 (ख) 9 (ग) 6 (घ) 10
(971) कौनसे शरीरायव का मांस सर्वाधिक गुरू होताहै।

(क) सक्थि (ख) स्कन्ध (ग) क्रोड (घ) शिर
(972) कौनसे शरीरायव का मांस सर्वाधिक गुरू होताहै।

(क) वृषण (ख) वृक्क (ग) यकृत (घ) मध्य देह
(973) भोज्य, भक्ष्य, चर्व्य, लेह्य, चोष्ट और पेय – आहार के 6 भेद किसने माने है।

(क) चरक, सुश्रुत (ख) भाव प्रकाश, शार्रग्धर (ग) चरक, वाग्भट्ट (घ) काश्यप, शार्रग्धर
(974) ‘गुल्म’ कौनसा धातु प्रदोषज विकार है।

(क) रस प्रदोषज (ख) रक्त प्रदोषज (ग) मांस प्रदोषज (घ) मज्जा प्रदोषज
(975) ‘ग्रन्थि’ कौनसा धातु प्रदोषज विकार है।

(क) रस प्रदोषज (ख) रक्त प्रदोषज (ग) मांस प्रदोषज (घ) उपधातुप्रदोषज
(976) ‘मूर्च्छा’ कौनसा धातु प्रदोषज विकार है।

(क) रस प्रदोषज (ख) रक्त प्रदोषज (ग) मांस प्रदोषज (घ) मज्जा प्रदोषज
(977) ‘अलजी’ कौनसा धातु प्रदोषज विकार है।

(क) मेद प्रदोषज (ख) रक्त प्रदोषज (ग) मांस प्रदोषज (घ) मज्जा प्रदोषज
(978) ‘क्लैव्य’ कौनसा धातु प्रदोषज विकार है।

(क) रस प्रदोषज (ख) रक्त प्रदोषज (ग) शु्क्र प्रदोषज (घ) रस, शु्क्र प्रदोषज
(979) ‘पाण्डुत्व’ कौनसा धातु प्रदोषज विकार है।

(क) रस प्रदोषज (ख) रक्त प्रदोषज (ग) मांस प्रदोषज (घ) मज्जा प्रदोषज
(980) ‘गर्भपात व गर्भस्राव’ कौनसा धातु प्रदोषज विकार है।

(क) आर्तव प्रदोषज (ख) रक्त प्रदोषज (ग) शु्क्र प्रदोषज (घ) शु्क्रार्तव प्रदोषज
(981) रस धातुप्रदोषज विकारों की चिकित्सा है।

(क) लंघन (ख) लंघन पाचन (ग) दोषावसेचन (घ) उर्पयुक्त सभी
(982) ‘पंचकर्माणि भेषजम्’ किस धातुप्रदोषज विकार की चिकित्सा में निर्देशित है।

(क) मांस (ख) मेद (ग) अस्थि (घ) मज्जा
(983) व्यवाय, व्यायाम, यथाकाल संशोधन। – किस धातुप्रदोषज विकार की चिकित्सा में निर्देशित है।

(क) अस्थि (ख) मज्जा (ग) शु्क्र प्रदोषज (घ) मज्जा, शु्क्र प्रदोषज
(984) ‘संशोधन, शस्त्र, अग्नि, क्षारकर्म।’ – किस धातुप्रदोषज विकार की चिकित्सा में निर्देशित हैं।

(क) मांस प्रदोषज (ख) मेद प्रदोषज (ग) अस्थि प्रदोषज (घ) उपधातु प्रदोषज
(985) चरक ने दोषों के कोष्ठ से शाखा में गमन के कितने कारण बताए है।

(क) 3 (ख) 4 (ग) 5 (घ) इनमें से कोई नहीं
(986) चरक ने दोषों के शाखा से कोष्ठ में गमन का कौनसा कारण नहीं बताया है।

(क) वृद्धि (ख) विष्यन्दन (ग) व्यायाम (घ) वायुनिग्रह
(987) श्रुत बुद्धिः स्मृतिः दाक्ष्यं धृतिः हितनिषेवणम्। – किसके गुण है ?

(क) आचार्य के (ख) शिष्य के (ग) परीक्षक के (घ) प्राणाभिसर के
(988) चरकोक्त दश प्राणायतन में शामिल नहीं है।

(क) हृदय (ख) वस्ति (ग) कण्ठ (घ) फुफ्फुस
(989) चरकमतानुसार ‘कुलीन’ किसकागुण है ?

(क) प्राणाभिसर वैद्य का (ख) धात्री का (ग) परीक्षक का (घ) रोगाभिसर वैद्य का
(990) ‘अर्थ’किसका पर्यायहै।

(क) हृदय (ख) मन (ग) आत्मा (घ) धन
(991) “आगारकर्णिका”की तुलना किससे की गयी है।

(क) हृदय (ख) मन (ग) आत्मा (घ) प्राणायतन
(992) ….. हर्षणानां।

(क) तत्वावबोधो (ख) इन्द्रियजयो (ग) विद्या (घ) अंहिसा
(993) ‘चेतनानुवृत्ति’किसका पर्यायहै।

(क) हृदय (ख) मन (ग) आत्मा (घ) आयु
(994) हित आयु एवं अहित आयु के लक्षण, सुखायु एवं दुःखायु के लक्षणों का विस्तृत वर्णन कहॉ मिलता है ?

(क) चरक सूत्रस्थान1 (ख) चरक सूत्रस्थान30 (ग) चरक इन्द्रियस्थान (घ) चरक शारीरस्थान
(995) निरोध किसका पर्याय है।

(क) मोक्ष (ख) मृत्यु (ग) आत्मा (घ) मन
(996) आयुर्वेद के नित्य या शाश्वत होने का कारण है।

(क) अनादित्वात् (ख) स्वभावसंसिद्ध लक्षणत्वात् (ग) भावस्वभाव नित्यात्व (घ) उर्पयुक्त सभी
(997) चरक ने एक वैद्य को दूसरे वैद्य की परीक्षा करने के लिए कितने प्रश्न पूछने का निर्देश दिया है।

(क) 8 (ख) 9 (ग) 15 (घ) 18
(998) वैद्य परीक्षा विषयक प्रश्न नहीं है।

(क) तंत्र (ख) स्थान (ग) सूत्र (घ) ज्ञान
(999) ‘आश्रय स्थान’ कहा जाता है।

(क) सूत्र स्थान (ख) शारीर स्थान (ग) कल्प स्थान (घ) चिकित्सा स्थान
(1000) आयुर्वेद तंत्र का ‘शुभ शिर’ है-

(क) सूत्र स्थान (ख) शारीर स्थान (ग) कल्प स्थान (घ) चिकित्सा स्थान

उत्तरमाला

901.क 921.ख 941.घ 961.क 981.क
902.ख 922.घ 942.क 962.ख 982.ग
903.ख 923.क 943.घ 963.क 983.घ
904.क 924.घ 944.ख 964.क 984.क
905.ग 925.ख 945.घ 965.ख 985.ख
906.घ 926.ग 946.क 966.क 986.ग
907.घ 927.क 947.ग 967.क 987.ग
908.ख 928.क 948.क 968.क 988.घ
909.ख 929.क 949.घ 969.क 989.क
910.ग 930.ग 950.ख 970.ख 990.क
911.क 931.घ 951.ग 971.घ 991.क
912.घ 932.क 952.ग 972.घ 992.क
913.ख 933.ख 953.घ 973.ख 993.घ
914.घ 934.ग 954.ग 974.ख 994.ख
915.ख 935.ग 955.ख 975.घ 995.ख
916.क 936.घ 956.ग 976.घ 996.घ
917.घ 937.ख 957.ग 977.ग 997.क
918.घ 938.घ 958.घ 978.घ 998.घ
919.क 939.घ 959.ग 979.क 999.ख
920.क 940.घ 960.क 980.ग 1000.क

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